श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरके मुखसे अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनकर अर्जुनकी जयद्रथको मारनेके लिये शपथपूर्ण प्रतिज्ञा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.73.11 
परिवार्य तु तै: सर्वैर्युधि बालो महारथै:।
यतमान: परं शक्त्या बहुभिर्विरथीकृत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर से घिरे होने पर भी उस बालक ने पूरी शक्ति लगाकर उन सबको परास्त करने का प्रयत्न किया; परन्तु वे संख्या में अधिक थे, इसलिए उन सभी महारथियों ने उसे घेर लिया और उसे रथहीन कर दिया ॥11॥
 
Even though surrounded, the boy tried with all his might to defeat them all; however, they were more in number, so all those great car-warriors surrounded him and left him chariotless. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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