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श्लोक 7.73.1  |
युधिष्ठिर उवाच
त्वयि याते महाबाहो संशप्तकबलं प्रति।
प्रयत्नमकरोत् तीव्रमाचार्यो ग्रहणे मम॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर बोले, "हे महाबली! जब आप संशप्तक सेना से युद्ध करने गये थे, उस समय आचार्य द्रोण ने मुझे पकड़ने का बड़ा प्रयत्न किया था। |
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| Yudhishthira said, "O mighty one! When you went to fight with the Samshaptaka army, at that time Acharya Drona made a great effort to capture me. |
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