Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.72.86: उस अवस्था में वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण या ज्येष्ठ पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर के अतिरिक्त अन्य सम्बन्धी न तो उनसे कुछ कह सकते थे और न उनकी ओर देखने का साहस ही कर सकते थे ॥86॥ | mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न भाषितुं शक्नुवन्ति द्रष्टुं वा सुहृदोऽर्जुनम्।
अन्यत्र वासुदेवाद्वा ज्येष्ठाद्वा पाण्डुनन्दनात्॥ ८६॥
अनुवाद
उस अवस्था में वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण या ज्येष्ठ पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर के अतिरिक्त अन्य सम्बन्धी न तो उनसे कुछ कह सकते थे और न उनकी ओर देखने का साहस ही कर सकते थे ॥86॥
In that state, except Vasudevanandan Lord Shri Krishna or senior Pandunandan Yudhishthir, other relatives could neither say anything to him nor did they dare to look at him. 86॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥