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mahabharat 7.72.55-56h: निश्चय ही शत्रुओं ने उसे मार डाला है और वह रक्त से लथपथ भूमि पर पड़ा है तथा आकाश से गिराए गए सूर्य के समान अपने शरीर के अंगों से इस पृथ्वी की शोभा बढ़ा रहा है। 55 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  7.72.55-56h 
नूनं स पातित: शेते धरण्यां रुधिरोक्षित:॥ ५५॥
शोभयन् मेदिनीं गात्रैरादित्य इव पातित:।
 
 
अनुवाद
निश्चय ही शत्रुओं ने उसे मार डाला है और वह रक्त से लथपथ भूमि पर पड़ा है तथा आकाश से गिराए गए सूर्य के समान अपने शरीर के अंगों से इस पृथ्वी की शोभा बढ़ा रहा है। 55 1/2
 
Surely the enemies have killed him and he is lying on the ground soaked in blood and like the Sun that has been thrown down from the sky, he is enhancing the beauty of this earth with his body parts. 55 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)