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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  7.72.54-55h 
यो मां नित्यमदीनात्मा प्रत्युद्‍गम्याभिनन्दति॥ ५४॥
उपायान्तं रिपून् हत्वा सोऽद्य मां किं न पश्यति।
 
 
अनुवाद
वह अभिमन्यु आज मुझे क्यों नहीं देख रहा है, जो प्रतिदिन मेरे शत्रुओं का वध करके शिविर में लौटने पर प्रसन्नतापूर्वक आगे आता था?
 
Why is that Abhimanyu not seeing me today, who used to come forward happily every day when I used to return to the camp after killing my enemies?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)