Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.72.52-53h: निश्चय ही मेरा यह हृदय अत्यन्त बलवान और वज्र का बना हुआ है; इसीलिए यदि मैं लाल नेत्रों वाले पराक्रमी अभिमन्यु को न भी देखूँ, तो भी यह नहीं फटता।   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.72.52-53h 
वज्रसारमयं नूनं हृदयं सुदृढं मम॥ ५२॥
अपश्यतो दीर्घबाहुं रक्ताक्षं यन्न दीर्यते।
 
 
अनुवाद
निश्चय ही मेरा यह हृदय अत्यन्त बलवान और वज्र का बना हुआ है; इसीलिए यदि मैं लाल नेत्रों वाले पराक्रमी अभिमन्यु को न भी देखूँ, तो भी यह नहीं फटता।
 
Surely this heart of mine is extremely strong and is made of a thunderbolt; that is why it does not burst even if I do not see the red-eyed, powerful Abhimanyu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)