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mahabharat 7.72.46-47h: इस प्रकार बार-बार विलाप करके अर्जुन ने जहाज से टूटे हुए शरीर वाले व्यापारी के समान महान शोक से भरकर युधिष्ठिर से इस प्रकार पूछा:॥46 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 72: अभिमन्युकी मृत्युके कारण अर्जुनका विषाद और क्रोध  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.72.46-47h 
एवं विलप्य बहुधा भिन्नपोतो वणिग् यथा॥ ४६॥
दु:खेन महताऽऽविष्टो युधिष्ठिरमपृच्छत।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बार-बार विलाप करके अर्जुन ने जहाज से टूटे हुए शरीर वाले व्यापारी के समान महान शोक से भरकर युधिष्ठिर से इस प्रकार पूछा:॥46 1/2॥
 
Having lamented thus repeatedly, Arjuna, filled with great sorrow like a merchant with a shipwrecked body, asked Yudhishthira thus:॥ 46 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)