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mahabharat 7.71.8: नारद बोले, "हे राजन! डाकुओं ने आपके पुत्र को अकारण ही किसी प्रताड़ित पशु की भाँति मार डाला है। मैं आपके मृत पुत्र को उस कष्टदायक नरक से निकालकर आपको लौटा रहा हूँ।"   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.71.8 
नारद उवाच
मृतं ददानि ते पुत्रं दस्युभिर्निहतं वृथा।
उद्‍धृत्य नरकात् कष्टात् पशुवत् प्रोक्षितं यथा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
नारद बोले, "हे राजन! डाकुओं ने आपके पुत्र को अकारण ही किसी प्रताड़ित पशु की भाँति मार डाला है। मैं आपके मृत पुत्र को उस कष्टदायक नरक से निकालकर आपको लौटा रहा हूँ।"
 
Narada said, "O King! The robbers have needlessly killed your son like a tortured animal. I am taking your dead son out of the painful hell and returning him to you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)