श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.71.23 
एवं विद्वान‍् महाराज मा शुच: साधयाम्यहम्।
एतावदुक्त्वा भगवांस्तत्रैवान्तरधीयत॥ २३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप यह सब जानते हैं। अतः शोक न करें। अब मैं अपने ध्यान में लगा हुआ हूँ। ऐसा कहकर भगवान व्यास वहाँ से अन्तर्धान हो गए।
 
Maharaj! You know all this. So do not grieve. Now I am engaged in my meditation. Saying this, Lord Vyasa disappeared from there. 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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