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mahabharat 7.71.16: आपके पुत्र ने भी उस अक्षय गति को प्राप्त कर लिया है, जो ध्यान द्वारा पवित्र ज्ञान प्राप्त करने वाले, निष्काम भाव से उत्तम यज्ञ करने वाले योगीजन तथा तेजोमय तप द्वारा तपस्वी मुनियों को प्राप्त होती है। 16॥   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.71.16 
यां योगिनो ध्यानविविक्तदर्शना:
प्रयान्ति यां चोत्तमयज्विनो जना:।
तपोभिरिद्धैरनुयान्ति यां तथा
तामक्षयां ते तनयो गतो गतिम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आपके पुत्र ने भी उस अक्षय गति को प्राप्त कर लिया है, जो ध्यान द्वारा पवित्र ज्ञान प्राप्त करने वाले, निष्काम भाव से उत्तम यज्ञ करने वाले योगीजन तथा तेजोमय तप द्वारा तपस्वी मुनियों को प्राप्त होती है। 16॥
 
Your son has also attained the inexhaustible state of being that is attained by those who have attained the sacred knowledge through meditation, the yogis who selflessly perform the best sacrifices and the ascetic sages through their bright penances. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)