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mahabharat 7.71.12: परन्तु वीर अभिमन्यु सिद्ध हो गया। वह शत्रु सेना के विरुद्ध युद्ध करने के लिए तत्पर हो गया, अपने हजारों शत्रुओं को क्रोधित कर दिया, मारा गया और स्वर्ग पहुँच गया।   |   mahabharat अध्याय 7.71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 71: नारदजीका सृंजयके पुत्रको जीवित करना और व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाकर अन्तर्धान होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.71.12 
शूरो वीर: कृतार्थश्च प्रताप्यारीन् सहस्रश:।
अभिमन्युर्गतो वीर: पृतनाभिमुखो हत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वीर अभिमन्यु सिद्ध हो गया। वह शत्रु सेना के विरुद्ध युद्ध करने के लिए तत्पर हो गया, अपने हजारों शत्रुओं को क्रोधित कर दिया, मारा गया और स्वर्ग पहुँच गया।
 
But the valiant Abhimanyu has been accomplished. He stood ready to fight against the enemy army, infuriated thousands of his enemies and was killed and has reached heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)