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mahabharat 7.66.13: यज्ञ करते समय राजा गायत्री ने प्रसन्नचित्त ब्राह्मणों तथा अन्य समस्त प्राणियों को समस्त कामनाओं से परिपूर्ण उत्तम अन्न दिया ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.66: राजा गयका चरित्र   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 66: राजा गयका चरित्र  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.66.13 
सर्वकामसमृद्धं च प्रादादन्नं गयस्तदा।
ब्राह्मणेभ्य: प्रहृष्टेभ्य: सर्वभूतेभ्य एव च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ करते समय राजा गायत्री ने प्रसन्नचित्त ब्राह्मणों तथा अन्य समस्त प्राणियों को समस्त कामनाओं से परिपूर्ण उत्तम अन्न दिया ॥13॥
 
While performing the yajna, king Gayatri gave the best of food, full of all the desires, to the brahmins and all other creatures who were elated. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)