श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 66: राजा गयका चरित्र  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.66.10 
नक्षत्रेषु च सर्वेषु ददन्नक्षत्रदक्षिणा:।
ईजे च विविधैर्यज्ञैर्यथा सोमोऽङ्गिरा यथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सोम और अंगिरा के समान उसने नाना प्रकार के यज्ञों द्वारा भगवान् की पूजा की, तथा समस्त नक्षत्रों में दक्षिणा दी॥10॥
 
Like Som and Angira, he worshipped the Lord in various types of sacrifices, giving dakshina in all the constellations.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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