श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 65: राजा शशबिन्दुका चरित्र  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.65.9 
वार्क्षाश्च यूपा यावन्त अश्वमेधे महामखे।
ते तथैव पुनश्चान्ये तावन्त: काञ्चनाऽभवन्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उनके महायज्ञ अश्वमेध में जितने काष्ठ के यूप प्रयुक्त हुए थे, वे सब ज्यों के त्यों रह गए और फिर उतने ही स्वर्ण के यूप बनाए गए॥9॥
 
All the wooden yupas that were used in his great sacrifice, the Ashwamedha, remained as they were. And then the same number of golden yupas were made.॥ 9॥
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