श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 64: राजा अम्बरीषका चरित्र  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.64.12 
तेषु यज्ञेष्वम्बरीषो दक्षिणामत्यकालयत्।
राज्ञां शतसहस्राणि दश प्रयुतयाजिनाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उन यज्ञोंमें राजा अम्बरीषने यज्ञ करनेवाले दस लाख ब्राह्मणोंको दक्षिणा दी थी, जो दस लाख राजाओंको दक्षिणारूप ही थी ॥12॥
 
In those yajnas king Ambarisha had given dakshina to ten lakh Brahmins performing the yajna in the form of dakshina to ten lakh kings only.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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