श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 62: राजा मान्धाताकी महत्ता  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.62.2 
यं देवावश्विनौ गर्भात् पितु: पूर्वं चकर्षतु:।
मृगयां विचरन् राजा तृषित: क्लान्तवाहन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में अश्विनीकुमार नामक दो देवताओं ने इन्हें अपने पिता के पेट से निकाला था। एक बार राजा युवनाश्व शिकार के लिए वन में विचरण कर रहे थे। वहाँ उनका घोड़ा थक गया और उन्हें प्यास भी लगी॥2॥
 
In the past, the two gods named Ashwinikumar had taken them out of their father's stomach. Once, King Yuvanashwa was wandering in the forest for hunting. There his horse got tired and he too felt thirsty.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)