श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 6: दुर्योधनका द्रोणाचार्यसे सेनापति होनेके लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 5-7
 
 
श्लोक  7.6.5-7 
रुद्राणामिव कापाली वसूनामिव पावक:।
कुबेर इव यक्षाणां मरुतामिव वासव:॥ ५॥
वसिष्ठ इव विप्राणां तेजसामिव भास्कर:।
पितॄणामिव धर्मेन्द्रो यादसामिव चाम्बुराट्॥ ६॥
नक्षत्राणामिव शशी दितिजानामिवोशना:।
श्रेष्ठ: सेनाप्रणेतॄणां स न: सेनापतिर्भव॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे रुद्रों में शंकर, वसुओं में पावक, यक्षों में कुबेर, देवताओं में इन्द्र, ब्राह्मणों में वसिष्ठ, प्रकाशमान वस्तुओं में भगवान सूर्य, पितरों में धर्मराज, जलचरों में वरुणदेव, तारों में चंद्रमा और दैत्यों में शुक्राचार्य, वैसे ही समस्त सेनापतियों में आप श्रेष्ठ हैं; अतः आप हमारे सेनापति हैं।
 
Like Shankar among the Rudras, Pavak among the Vasus, Kubera among the Yakshas, ​​Indra among the gods, Vasishtha among the Brahmins, Lord Surya among the luminous objects, Dharmaraj among the ancestors, Varundev among the aquatic creatures, Moon among the stars and Shukraacharya among the demons, you are the best among all the commanders; therefore, you are our commander.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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