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श्लोक 7.6.13  |
सैनिकाश्च मुदा युक्ता वर्धयन्ति द्विजोत्तमम्।
दुर्योधनं पुरस्कृत्य प्रार्थयन्तो महद् यश:।
दुर्योधनं ततो राजन् द्रोणो वचनमब्रवीत्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| अन्य सैनिक भी प्रसन्न होकर दुर्योधन को आगे करके महान यश की इच्छा से द्रोणाचार्य की प्रशंसा करने लगे तथा उनका मनोबल बढ़ाने लगे। राजन! उस समय द्रोणाचार्य ने दुर्योधन से कहा। |
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| The other soldiers too were pleased and putting Duryodhan in front, desiring great fame, started praising Dronacharya and boosting his morale. King! At that time Dronacharya said to Duryodhan. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि द्रोणप्रोत्साहने षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें द्रोणको उत्साह-प्रदानविषयक छठा अध्याय पूरा हुआ॥ ६॥
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