Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.59.14-15h: (यज्ञों या अग्निहोत्रगृहों में) अग्निदेव की अग्नि सर्वत्र प्रज्वलित रहती थी। उन दिनों किसी प्रकार की कोई विपत्ति नहीं होती थी। सभी लोग दीर्घायु होते थे। कोई भी युवा नहीं मरता था॥14 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.59: भगवान् श्रीरामका चरित्र । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पर्यदीप्यन्त तेजांसि तदानर्थाश्च नाभवन्॥ १४॥
दीर्घायुष: प्रजा: सर्वा युवा न म्रियते तदा।
अनुवाद
(यज्ञों या अग्निहोत्रगृहों में) अग्निदेव की अग्नि सर्वत्र प्रज्वलित रहती थी। उन दिनों किसी प्रकार की कोई विपत्ति नहीं होती थी। सभी लोग दीर्घायु होते थे। कोई भी युवा नहीं मरता था॥14 1/2॥
(In yagyas or Agnihotra-grihas) the fire of Agnidev used to burn everywhere. In those days no calamity of any kind used to happen. All the people used to live long. No young person used to die.॥ 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥