युधिष्ठिर बोले - ब्रह्मन्! इन्द्र के समान पराक्रमी, श्रेष्ठ, पुण्यात्मा, पापरहित और सत्यवादी राजर्षि अपने योग्य उत्तम लोक (लोक) में निवास करते हैं॥2॥
Yudhishthir said – Brahmin! Like Indra, the mighty, noble, virtuous, sinless and truthful Rajarishis reside in the best place (world) worthy of them. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥