श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  7.54.56-57 
अभिमन्यु: परान् हत्वा प्रमुखे सर्वधन्विनाम्॥ ५६॥
युध्यमानो महेष्वासो हत: सोऽभिमुखो रणे।
असिना गदया शक्त्या धनुषा च महारथ:।
विरजा: सोमसूनु: स पुनस्तत्र प्रलीयते॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
महाधनुर्धर अभिमन्यु पूर्वजन्म में चन्द्रमा का पुत्र था। उस महाबली योद्धा ने रणभूमि में तलवार, भाला, गदा और धनुष से आमने-सामने युद्ध करते हुए अन्य सभी धनुर्धरों के सामने ही अपने शत्रुओं का वध कर दिया। और शोक से मुक्त होकर वह पुनः चन्द्रलोक को चला गया ॥ 56-57॥
 
The great archer Abhimanyu was the son of the Moon in his previous birth. That mighty warrior killed his enemies in the battlefield in front of all other archers, fighting face to face with the sword, spear, mace and bow. And, free from sorrow, he again went to the Moon-lok. ॥ 56-57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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