vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार
»
श्लोक 36-37h
श्लोक
7.54.36-37h
सैवमुक्ता महाराज कृताञ्जलिरिदं विभुम्॥ ३६॥
पुनरेवाब्रवीद् वाक्यं प्रसाद्य शिरसा तदा।
अनुवाद
महाराज! उनके ऐसा कहने पर मृत्यु ने हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर ब्रह्माजी को प्रसन्न करके पुनः यह वचन कहा -॥36 1/2॥
Maharaj! On his saying this, Mrityu, with folded hands and bowed her head and pleased Lord Brahma, then again said these words -॥ 36 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas