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श्लोक 7.54.29  |
मृत्यो किमिदमत्यन्तं तपांसि चरसीति ह।
ततोऽब्रवीत् पुनर्मृत्युर्भगवन्तं पितामहम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| हे मृत्यु! तू इतना कठोर तप क्यों कर रहा है?’ तब मृत्यु ने पुनः भगवान पितामह से इस प्रकार कहा-॥29॥ |
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| Death! Why are you performing such severe penance?' Then Mrityu again said to Lord Pitamah like this - ॥ 29॥ |
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