vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 54: मृत्युकी घोर तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उसे वरकी प्राप्ति तथा नारद-अकम्पन-संवादका उपसंहार
»
श्लोक 15
श्लोक
7.54.15
निवृत्तरोषे तस्मिंस्तु भगवत्यपराजिते।
सा कन्यापि जगामाथ समीपात् तस्य धीमत:॥ १५॥
अनुवाद
जब उन अपराजित ब्रह्माजी का क्रोध शान्त हो गया, तब वह कन्या भी उन परम बुद्धिमान् भगवान् के समीप से अन्यत्र चली गई॥15॥
When the anger of that undefeated Lord Brahma subsided, that girl also went somewhere else from the proximity of that supremely intelligent God. 15॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas