श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  7.53.7 
तव प्रसादाद् भगवन्निदं वर्तेत् त्रिधा जगत‍्।
अनागतमतीतं च यच्च सम्प्रति वर्तते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आपकी कृपा से यह जगत् भूत, भविष्य और वर्तमान - इन तीन रूपों में विभक्त हो जाता है॥7॥
 
Lord! By your grace this world gets divided into three forms – past, future and present. 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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