श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 53: शंकर और ब्रह्माका संवाद, मृत्युकी उत्पत्ति तथा उसे समस्त प्रजाके संहारका कार्य सौंपा जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.53.23 
पाणिभ्यां प्रतिजग्राह तान्यश्रूणि पितामह:।
सर्वभूतहितार्थाय तां चाप्यनुनयत् तदा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों के हित के लिए पितामह ब्रह्मा ने उन आँसुओं को अपने हाथों में ले लिया और उस स्त्री को भी समझा-बुझाकर शांत किया ॥23॥
 
For the benefit of all living beings, Grandfather Brahma took those tears in his hands and also pacified that woman by persuasion. ॥23॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि मृत्युकथने त्रिपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें मृत्युवर्णनविषयक तिरपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५३॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल २३ १/२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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