श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 50: तीसरे (तेरहवें) दिनके युद्धकी समाप्तिपर सेनाका शिविरको प्रस्थान एवं रणभूमिका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.50.9 
अतीव हृष्टा: श्वशृगालवायसा
बका: सुपर्णाश्च वृकास्तरक्षव:।
वयांस्यसृक्पान्यथ रक्षसां गणा:
पिशाचसंघाश्च सुदारुणा रणे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कुत्ते, गीदड़, कौवे, बगुले, चील, भेड़िये, चीते, रक्तपिपासु पक्षी, राक्षसों के समूह और अत्यन्त भयंकर भूत-प्रेत उस रणभूमि में आनन्द कर रहे थे॥9॥
 
Dogs, jackals, crows, herons, eagles, wolves, leopards, blood-sucking birds, groups of demons and extremely fearsome ghosts were rejoicing in that battle-field.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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