श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 50: तीसरे (तेरहवें) दिनके युद्धकी समाप्तिपर सेनाका शिविरको प्रस्थान एवं रणभूमिका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.50.14 
तथा तदायोधनमुग्रदर्शनं
निशामुखे पितृपतिराष्ट्रवर्धनम्।
निरीक्षमाणा: शनकैर्जहुर्नरा:
समुत्थिता नृत्तकबन्धसंकुलम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
प्रातःकाल के समय यमराज के राज्य को बढ़ाने वाली वह युद्धभूमि बड़ी भयानक दिखाई दे रही थी। चारों ओर नाचते हुए धड़ दिखाई दे रहे थे। यह सब देखकर दोनों पक्षों के योद्धा धीरे-धीरे उस युद्धभूमि से चले गए॥14॥
 
During the morning dawn, that battlefield which increased the kingdom of Yamraj appeared very terrifying. Dancing torsos were seen everywhere. Seeing all this, the warriors of both the sides left that battlefield slowly.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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