श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 50: तीसरे (तेरहवें) दिनके युद्धकी समाप्तिपर सेनाका शिविरको प्रस्थान एवं रणभूमिका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.50.1 
संजय उवाच
वयं तु प्रवरं हत्वा तेषां तै: शरपीडिता:।
निवेशायाभ्युपायाम: सायाह्ने रुधिरोक्षिता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! शत्रुओं के उस प्रधान योद्धा को मारकर हम लोग उनके बाणों से पीड़ित होकर संध्या समय विश्राम करने के लिए शिविर में आये थे। उस समय हमारे शरीर रक्त से लथपथ थे॥1॥
 
Sanjaya says - O King! After killing that chief warrior of the enemies, we came back to the camp in the evening to rest after being afflicted by their arrows. At that time our bodies were soaked in blood.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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