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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.5.8 
न विना नायकं सेना मुहूर्तमपि तिष्ठति।
आहवेष्वाहवश्रेष्ठ नेतृहीनेव नौर्जले॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे रणभूमि के श्रेष्ठ योद्धाओं! सेनापति के बिना कोई भी सेना युद्ध में दो क्षण भी नहीं टिक सकती। जैसे नाविक के बिना नाव जल में स्थिर नहीं रह सकती।
 
O best warriors of the battlefield! Without a commander, no army can survive in battle for even two moments. Just like a boat cannot remain stable in water without a sailor. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)