श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.5.13 
कर्ण उवाच
सर्व एव महात्मान इमे पुरुषसत्तमा:।
सेनापतित्वमर्हन्ति नात्र कार्या विचारणा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा, "हे राजन! ये सभी महाबुद्धिमान पुरुष महान राजा और सेनापति होने के योग्य हैं। इस विषय में अन्यथा विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।" ॥13॥
 
Karna said, "O King! All these great-minded men are worthy of being the great king and the commander-in-chief. There is no need to think otherwise in this matter." ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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