Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.5.10: जैसे पथ-प्रदर्शक के बिना यात्रियों का समूह बड़े कष्ट में पड़ जाता है, वैसे ही सेनापति के बिना सेना को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ॥10॥ | mahabharat अध्याय 7.5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अदेशिको यथा सार्थ: सर्व: कृच्छ्रं समृच्छति।
अनायका तथा सेना सर्वान् दोषान् समर्छति॥ १०॥
अनुवाद
जैसे पथ-प्रदर्शक के बिना यात्रियों का समूह बड़े कष्ट में पड़ जाता है, वैसे ही सेनापति के बिना सेना को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ॥10॥
Just as a group of travelers finds themselves in great trouble without a guide, so an army without a commander has to face all kinds of difficulties. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥