श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 5: कर्णका दुर्योधनके समक्ष सेनापति-पदके लिये द्रोणाचार्यका नाम प्रस्तावित करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.5.1 
संजय उवाच
रथस्थं पुरुषव्याघ्रं दृष्ट्वा कर्णमवस्थितम्।
हृष्टो दुर्योधनो राजन्निदं वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! सिंहरूपी कर्ण को रथ पर बैठा देखकर दुर्योधन प्रसन्न होकर यह कहने लगा -॥1॥
 
Sanjaya says - O King! Seeing the lion-man Karna sitting on the chariot, Duryodhana became happy and said this -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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