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mahabharat 7.45.7: वे सभी वीर योद्धा जो उस समय युद्ध छोड़कर अभिमन्यु के पास नहीं गए, कभी वापस नहीं लौटे। ठीक वैसे ही जैसे नदियाँ समुद्र में मिलकर वहाँ से कभी वापस नहीं लौटतीं।   |   mahabharat अध्याय 7.45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 45: अभिमन्युके द्वारा सत्यश्रवा, क्षत्रियसमूह, रुक्मरथ तथा उसके मित्रगणों और सैकड़ों राजकुमारोंका वध और दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  7.45.7 
ये केचन गतास्तस्य समीपमपलायिन:।
न ते प्रतिन्यवर्तन्त समुद्रादिव सिन्धव:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे सभी वीर योद्धा जो उस समय युद्ध छोड़कर अभिमन्यु के पास नहीं गए, कभी वापस नहीं लौटे। ठीक वैसे ही जैसे नदियाँ समुद्र में मिलकर वहाँ से कभी वापस नहीं लौटतीं।
 
All those brave warriors who did not run away from the battle and went to Abhimanyu at that time never returned. Just like the rivers that merge into the ocean never return from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)