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mahabharat 7.42.9: धृतराष्ट्र बोले - संजय! मैं समझता हूँ कि सिन्धुराज जयद्रथ पर यह बहुत बड़ा भार था कि उसने अकेले होते हुए भी अपने पुत्र की रक्षा के लिए आतुर और क्रोधित पाण्डवों को रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.42.9 
धृतराष्ट्र उवाच
अतिभारमहं मन्ये सैन्धवे संजयाहितम्।
यदेक: पाण्डवान् क्रुद्धान् पुत्रप्रेप्सूनवारयत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय! मैं समझता हूँ कि सिन्धुराज जयद्रथ पर यह बहुत बड़ा भार था कि उसने अकेले होते हुए भी अपने पुत्र की रक्षा के लिए आतुर और क्रोधित पाण्डवों को रोक दिया।
 
Dhritarashtra said - Sanjaya! I think that this was a very big burden on Sindhuraj Jayadratha, that even though he was alone, he stopped the Pandavas who were eager and angry to protect their son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)