श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.42.8 
उग्रधन्वा महेष्वासो दिव्यमस्त्रमुदीरयन्।
वार्धक्षत्रिरुपासेधत् प्रवणादिव कुञ्जर:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जैसे हाथी नीची भूमि पर आकर शत्रुओं को वहीं से भगा देता है, उसी प्रकार ज्येष्ठ क्षत्रकुमार जयद्रथ ने भयंकर और महान धनुष धारण करके दिव्यास्त्रों का प्रयोग करके शत्रुओं की गति रोक दी॥8॥
 
Just as an elephant comes to the low ground and fends off the enemy from there, similarly, Jayadratha, the elder Kshatrakumar, wielding a fierce and great bow, stopped the progress of the enemies by using divine weapons. 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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