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mahabharat 7.42.22: महाराज! उस समय यह देखकर कि सारा भार जयद्रथ पर पड़ा है, आपके वीर क्षत्रिय जयजयकार करते हुए उस ओर दौड़े, जिधर युधिष्ठिर की सेना थी।   |   mahabharat अध्याय 7.42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.42.22 
दृष्ट्वा तु क्षत्रिया भारं सैन्धवे सर्वमाहितम्।
उत्क्रुश्याभ्यद्रवन् राजन् येन यौधिष्ठिरं बलम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय यह देखकर कि सारा भार जयद्रथ पर पड़ा है, आपके वीर क्षत्रिय जयजयकार करते हुए उस ओर दौड़े, जिधर युधिष्ठिर की सेना थी।
 
King! At that time, seeing that the entire burden was on Jayadratha, your brave Kshatriyas started shouting and rushed towards the side where Yudhishthira's army was.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि जयद्रथयुद्धे द्विचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें जयद्रथयुद्धविषयक बयालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)