श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.42.11 
किं दत्तं हुतमिष्टं वा किं सुतप्तमथो तप:।
सिंधुराजो हि येनैक: पाण्डवान् समवारयत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सिन्धुराज ने ऐसा कौन-सा दान, यज्ञ, यज्ञ या महान तप किया था कि वह अकेले ही समस्त पाण्डवों को रोकने में समर्थ हो गया?॥11॥
 
What charity, sacrifice, yajna or great penance did Sindhuraj perform that he alone was able to stop all the Pandavas? ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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