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mahabharat 7.42.10: मैं इस बात को बहुत आश्चर्य मानता हूँ कि सिंधु के राजा में इतना बल और पराक्रम है। महाबली जयद्रथ के बल और पराक्रम का मुझे विस्तारपूर्वक वर्णन करो।   |   mahabharat अध्याय 7.42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 42: अभिमन्युके पीछे जानेवाले पाण्डवोंको जयद्रथका वरके प्रभावसे रोक देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.42.10 
अत्यद्भुतमहं मन्ये बलं शौर्यं च सैन्धवे।
तस्य प्रब्रूहि मे वीर्यं कर्म चाग्रॺं महात्मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं इस बात को बहुत आश्चर्य मानता हूँ कि सिंधु के राजा में इतना बल और पराक्रम है। महाबली जयद्रथ के बल और पराक्रम का मुझे विस्तारपूर्वक वर्णन करो।
 
I consider it very surprising that the king of Sindhu possesses such strength and valour. Describe to me in detail the strength and valour of the great man Jayadratha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)