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श्लोक 7.4.18  |
क्ष्वेडितास्फोटितरवै: सिंहनादरवैरपि।
धनु:शब्दैश्च विविधै: कुरव: समपूजयन्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय समस्त कौरवों ने गर्जना, ताली बजाकर, गर्जना करके तथा धनुष आदि से नाना प्रकार की ध्वनि करके कर्ण का स्वागत किया॥18॥ |
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| At that time all the Kauravas welcomed Karna by roaring, clapping, roaring and making various sounds from their bows etc.॥ 18॥ |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि कर्णाश्वासे चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें कर्णका आश्वासनविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥
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