vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 4: भीष्मजीका कर्णको प्रोत्साहन देकर युद्धके लिये भेजना तथा कर्णके आगमनसे कौरवोंका हर्षोल्लास
»
श्लोक 15
श्लोक
7.4.15
निशम्य वचनं तस्य चरणावभिवाद्य च।
ययौ वैकर्तन: कर्ण: समीपं सर्वधन्विनाम्॥ १५॥
अनुवाद
भीष्म के ये वचन सुनकर विकर्तनपुत्र कर्ण ने उनके चरणों में प्रणाम किया और फिर समस्त धनुर्धर सैनिकों से मिलने गया।
On hearing these words of Bhishma, Karna, the son of Vikartana, bowed at his feet and then went to meet all the archer soldiers.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas