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श्लोक 7.39.14-15  |
द्रोणस्य प्रीतिसंयुक्तं श्रुत्वा वाक्यं तवात्मज:।
आर्जुनिं प्रति संक्रुद्धो द्रोणं दृष्ट्वा स्मयन्निव॥ १४॥
अथ दुर्योधन: कर्णमब्रवीद् बाह्लिकं नृप:।
दु:शासनं मद्रराजं तांस्तथान्यान् महारथान्॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| अभिमन्यु के विषय में द्रोणाचार्य के ये प्रेमपूर्ण वचन सुनकर आपका पुत्र राजा दुर्योधन क्रोधित हो गया और द्रोणाचार्य की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कर्ण, बाह्लीक, दु:शासन, मद्रराज शल्य तथा अन्य महारथियों से बोला-॥ 14-15॥ |
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| On hearing these loving words of Dronacharya regarding Abhimanyu, your son King Duryodhana became angry and looking at Dronacharya smilingly spoke to Karna, Bahlik, Dushasan, Madra King Shalya and other great warriors -॥ 14-15॥ |
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