श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  7.39.11-12 
एष गच्छति सौभद्र: पार्थानां प्रथितो युवा।
नन्दयन् सुहृद: सर्वान् राजानं च युधिष्ठिरम्॥ ११॥
नकुलं सहदेवं च भीमसेनं च पाण्डवम्।
बन्धून् सम्बन्धिनश्चान्यान् मध्यस्थान् सुहृदस्तथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पार्थकुल का यह प्रसिद्ध युवा योद्धा सुभद्राकुमार अभिमन्यु अपने समस्त मित्रों, राजा युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव और पाण्डुपुत्र भीमसेन, अन्य भाइयों और सम्बन्धियों, सम्बन्धियों तथा मध्यस्थ मित्रों को भी आनन्द प्रदान कर रहा है ॥11-12॥
 
This famous young warrior Subhadrakumar Abhimanyu of Parthakul is giving joy to all his friends, King Yudhishthir, Nakul, Sahadev and Pandu's son Bhimsen, other brothers and relatives, relatives and intermediary friends too. 11-12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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