|
| |
| |
श्लोक 7.39.1  |
धृतराष्ट्र उवाच
द्वैधीभवति मे चित्तं ह्रिया तुष्टॺा च संजय।
मम पुत्रस्य यत् सैन्यं सौभद्र: समवारयत्॥ १॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| धृतराष्ट्र बोले - संजय! यह सुनकर कि सुभद्रा के पुत्र ने मेरे पुत्र की सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया, मेरा मन लज्जा और प्रसन्नता की दो अवस्थाओं में है॥1॥ |
| |
| Dhritarashtra said - Sanjay! On hearing that Subhadra's son stopped my son's army from advancing, my mind is in two states of shame and happiness. ॥1॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|