श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 39: द्रोणाचार्यके द्वारा अभिमन्युके पराक्रमकी प्रशंसा तथा दुर्योधनके आदेशसे दु:शासनका अभिमन्युके साथ युद्ध आरम्भ करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.39.1 
धृतराष्ट्र उवाच
द्वैधीभवति मे चित्तं ह्रिया तुष्टॺा च संजय।
मम पुत्रस्य यत् सैन्यं सौभद्र: समवारयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय! यह सुनकर कि सुभद्रा के पुत्र ने मेरे पुत्र की सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया, मेरा मन लज्जा और प्रसन्नता की दो अवस्थाओं में है॥1॥
 
Dhritarashtra said - Sanjay! On hearing that Subhadra's son stopped my son's army from advancing, my mind is in two states of shame and happiness. ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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