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mahabharat 7.38.15: अपने अद्वितीय एवं वेगशाली अस्त्रों का प्रदर्शन करते हुए, वीर अर्जुनपुत्र ने पहले तो सौम्यता से युद्ध किया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.38: अभिमन्युके द्वारा शल्यके भाईका वध तथा द्रोणाचार्यकी रथसेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.38.15 
संदर्शयिष्यन्नस्त्राणि विचित्राणि लघूनि च।
आर्जुनि: समरे शूरो मृदुपूर्वमयुध्यत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अपने अद्वितीय एवं वेगशाली अस्त्रों का प्रदर्शन करते हुए, वीर अर्जुनपुत्र ने पहले तो सौम्यता से युद्ध किया॥15॥
 
Displaying his unique and swift weapons, the valiant son of Arjuna initially fought with gentleness.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)