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mahabharat 7.37.30: तब महाबली अभिमन्यु ने अत्यन्त कुपित होकर अन्य तीन तीखे बाणों से सुषेण, दीर्घलोचन और कुण्डभेदी इन तीनों योद्धाओं को घायल कर दिया॥30॥   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.37.30 
तथान्यैर्निशितैर्बाणै: सुषेणं दीर्घलोचनम्।
कुण्डभेदिं च संक्रुद्धस्त्रिभिस्त्रीनवधीद् बली॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली अभिमन्यु ने अत्यन्त कुपित होकर अन्य तीन तीखे बाणों से सुषेण, दीर्घलोचन और कुण्डभेदी इन तीनों योद्धाओं को घायल कर दिया॥30॥
 
Then the mighty Abhimanyu, being very angry, wounded these three warriors – Sushen, Deerglochan and Kundbhedi with other three sharp arrows. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)