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mahabharat 7.37.20: तब आपके सभी पुत्र मिलकर अभिमन्यु को कष्ट देने लगे, तब वह क्रोधित होकर अपनी अस्त्र विद्या और अपने हृदय की महान शक्ति का प्रदर्शन करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 7.37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 37: अभिमन्युका पराक्रम, उसके द्वारा अश्मकपुत्रका वध, शल्यका मूर्च्छित होना और कौरव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.37.20 
ततोऽभिमन्यु: संक्रुद्धस्त्रास्यमानस्तवात्मजै:।
विदर्शयन् वै सुमहच्छिक्षौरसकृतं बलम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब आपके सभी पुत्र मिलकर अभिमन्यु को कष्ट देने लगे, तब वह क्रोधित होकर अपनी अस्त्र विद्या और अपने हृदय की महान शक्ति का प्रदर्शन करने लगा।
 
Then all your sons together began to harass Abhimanyu. Then he became furious and started displaying his training in weapons and the great strength of his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)