श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  7.35.7 
समीपे वर्तमानांस्तान् भारद्वाजोऽतिवीर्यवान्।
असम्भ्रान्त: शरौघेण महता समवारयत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाजनंदन द्रोणाचार्य बड़े वीर थे। शत्रुओं के आक्रमण से वे तनिक भी भयभीत नहीं हुए। उन्होंने अपने निकट आए पाण्डव योद्धाओं पर बाणों की भारी वर्षा करके उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
 
Bharadwajanandan Dronacharya was a very brave person. He was not at all frightened by the attack of the enemies. He stopped the Pandava warriors who came near him from moving ahead by showering them with a heavy shower of arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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