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श्लोक 7.35.31  |
संजय उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा स यन्तारमचोदयत्।
सुमित्राश्वान् रणे क्षिप्रं द्रोणानीकाय चोदय॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं - हे राजन! राजा युधिष्ठिर के ये वचन सुनकर अभिमन्यु ने अपने सारथि को आदेश दिया - 'सुमित्र! तुम शीघ्रता से घोड़ों को युद्धभूमि में द्रोणाचार्य की सेना की ओर ले चलो।' |
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| Sanjaya says - O King! On hearing these words of King Yudhishthira, Abhimanyu ordered his charioteer - 'Sumitra! You quickly drive the horses to the battlefield towards Dronacharya's army. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि अभिमन्युवधपर्वणि अभिमन्युप्रतिज्ञायां पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत अभिमन्युवधपर्वमें अभिमन्युकी प्रतिज्ञाविषयक पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५॥
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