श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.35.27 
नाहं पार्थेन जात: स्यां न च जात: सुभद्रया।
यदि मे संयुगे कश्चिज्जीवितो नाद्य मुच्यते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि आज मुझसे युद्ध करके कोई सैनिक जीवित बचेगा तो मैं अर्जुन का पुत्र नहीं हूँ और न ही सुभद्रा के गर्भ से उत्पन्न हुआ हूँ॥ 27॥
 
If any soldier survives after fighting with me today, then I am not the son of Arjun and I was not born from the womb of Subhadra.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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